रायगढ़: चावल गबन में लगातार टॉप फाइव जिलों में, सिस्टम में सुधार की दरकार

SURYA NEWS RAIGARH
0

खाद्य विभाग छत्तीसगढ़ खबर

 रायगढ़: चावल गबन में लगातार टॉप फाइव जिलों में, सिस्टम में सुधार की दरकार

रायगढ़, 8 अगस्त 2025 – 

छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत अनाज वितरण को पारदर्शी और सुचारु बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। रायगढ़ जिला, पिछले कई वर्षों से चावल गबन के मामलों में टॉप फाइव जिलों में शामिल रहा है, और यह स्थिति अभी भी बनी हुई है।

 चावल गबन के आंकड़े – रायगढ़ की स्थिति चिंताजनक

✅ सितंबर 2022:

राज्य भर में कुल 1,15,540 क्विंटल चावल का गबन सामने आया।

रायगढ़ में 8,481 क्विंटल चावल गबन हुआ।

जिसमें से 6,279 क्विंटल की वसूली हो चुकी है।

जबकि 2,202 क्विंटल की वसूली अब भी लंबित है।

✅ मार्च 2024:

नए सत्यापन में रायगढ़ तीसरे स्थान पर पहुंच गया।

इस बार 4,119 क्विंटल चावल की गबन के लिए RRC (Revenue Recovery Certificate) जारी किए गए।

लेकिन अब तक सिर्फ 745 क्विंटल की ही वसूली हो सकी है।

चावल गबन कैसे होता है? – सिस्टम की कमजोरी

पीडीएस के माध्यम से मिलने वाला अनाज जैसे चावल, चना और शक्कर, वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचने के बजाय बिचौलियों और राइस मिलर्स के पास पहुंच जाता है। एक संगठित नेटवर्क है जिसमें शामिल हैं:

राशन दुकानों के कर्मचारी

मिलर्स के एजेंट

स्थानीय बिचौलिये

यह चावल 27 से 29 रुपये प्रति किलो की दर से राइस मिलर्स को बेच दिया जाता है, जो इसे फिर से नए चावल में मिलाकर कूटमार करते हैं और वापस सिस्टम में खपा देते हैं।

 राइस मिलर्स की भूमिका – "सिस्टम में सेट एजेंट"

रायगढ़ में राइस मिलर्स का एक शक्तिशाली समूह सक्रिय है जो केवल पीडीएस चावल के भरोसे व्यापार कर रहा है। इनका नेटवर्क इतना मजबूत है कि राशन दुकानों में इनके एजेंट तक फिट हैं, जो हर महीने सैकड़ों क्विंटल चावल को बिना वितरण किए सीधे मिल तक पहुंचा देते हैं।


 वसूली नहीं, सिर्फ आंकड़ों की बाज़ीगरी

राज्य सरकार ने पीडीएस घोटाले रोकने के लिए भौतिक सत्यापन और वसूली प्रक्रिया की शुरुआत की थी। लेकिन हकीकत यह है कि आंकड़ों की हेराफेरी कर दिखावे की कार्रवाई की जा रही है। जितनी तेजी से गबन हो रहा है, उस हिसाब से वसूली ना के बराबर है।

आखिर सवाल यह है...

क्या खाद्य विभाग के पास इस नेटवर्क को तोड़ने की इच्छाशक्ति है?

क्या सिर्फ सत्यापन और RRC से सुधार संभव है?

कब तक जरूरतमंदों का हक यूं ही बिचौलियों की जेब में जाता रहेगा?

रायगढ़ जैसे जिले में बार-बार चावल गबन का मामला सामने आना सिस्टम की गंभीर विफलता को उजागर करता है। जब तक स्थानीय एजेंटों, मिलर्स और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत को तोड़ा नहीं जाएगा, तब तक भले ही सरकार कितनी भी योजना चला ले – गरीबों का हक नहीं मिल पाएगा।

सरकार को चाहिए कि वह डिजिटल निगरानी, सख्त दंड, और जन-सहभागिता के माध्यम से इस काले खेल पर लगाम लगाए।

Post a Comment

0 Comments

Post a Comment (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!